अमेरिका में नौकरी छोड़ क्यों चुनी मनीष ने हिन्दी साहित्य उत्थान की राह, ओर क्यों शुरु किया “हिन्दी कविता” यूट्यूब चैनल – मनीष गुप्ता

जिस तरह हम सभी का हिंदी के प्रति असीम स्नेह व गहरा संबंध है। वैसे ही जैसे माँ का अपने बच्चों के लिए निस्वार्थ प्रेम होता है । उसी प्रकार हमारा भी दुलार हिंदी के प्रति है।

वहीं एक ऐसे भी शख्सियत है, जिन्होंने हिन्दी साहित्य के अथाह प्रेम के लिए अमेरिका में अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया। और भारत आकर हिन्दी साहित्यकारों के साहित्य को संभालने की पहल को शुरु किया है। जिसमें इनका साथ बाॅलीवुड की बड़ी से बड़ी हस्तियों ने दिया व आज विश्व में इनका यूट्यूब चैनल हिन्दी कविता अपनी अलग पहचान बना चुका है।

आज हम मनीष गुप्ता जी की बात कर रहे हैं।

जो हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए आगे बढ़े व इन्हें हिंदी कविताओं से इतना ज्यादा लगाव है, कि ये अब उसके लिए पूर्ण रुप से समर्पित होकर काम कर रहे है।

मनीष जी जिनका जन्म सन् 1969 मैं बैतूल मध्यप्रदेश में हुआ। स्कूली शिक्षा इनकी अपने गृहनगर से ही हुई, पढ़ाई में ये काफी होशियार छात्रों में शामिल रहे है। इनका बचपन यहीं व्यतीत हुआ, और कक्षा 11वीं के समय इन्होंने मैथ्स सांईस लिया व अपनी पढ़ाई को मन लगाकर करने लगे।

सिर्फ पढ़ाई में ध्यान लगाए रखना ये ज्यादा पसंद करते थे, स्कूल के बाद अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी करने लगे।

समय के साथ फिर इन्होंने सर्विस इंडस्ट्री में एमबीए किया, ओर अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने विदेश में जाकर नौकरी करने का सपना देखा। तथा इन्होंने उस सपने को पंख दिए व लगभग सन् 1998 के करीब इन्हें यूएसए अमेरिका जाने का मौका मिला ओर ये विदेश के लिए रवाना हो गए। 

अमेरिका जाकर ये वहां की एक बहुप्रतिष्ठित कम्पनी में लगातार अच्छे पैकेज व उच्च पद पर नौकरी करने लगे। पर मन में कुछ कमी का अहसास होने लगा था, कि कुछ तो अधूरापन है? 

जीवन में जिसकी सार्थकता की तलाश में अभी सफर तय करना बाकी है। अमेरिका में लगातार छः सालों तक नौकरी करने के बाद इन्होंने फिल्म मेकिंग के क्षेत्र में जाने का सोचा और फैसला कर इन्होंने न्यूयार्क फिल्म एकेडमी से फिल्म मेकिंग का कोर्स किया। ओर वहां उससे जुड़कर काम  को सीखा व इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने लगे। उस वक्त इन्होंने दो फीचर फिल्मों का निर्माण किया।

फिल्मों के निर्माण के बाद इन्हें अचानक लगने लगा कि अब सही समय आ गया है, अपने देश जाने का। बस उसी के बाद सन् 2007 के दौरान ये भारत वापस लौट आये और यहां आकर टेलीविजन जगत में काम करने लगे, और स्वयं को यहीं प्रतिष्ठित किया। 

जब मनीष अमेरिका से वापस आए तब इन्होंने देखा, कि यहाँ कोई हिन्दी में बात करना इतना ज्यादा पसंद नहीं करता है। हर कोई अंग्रेजी भाषा के पीछे भाग रहा हैं, इन्होंने कभी किसी ओर भाषा का प्रयोग गलत नहीं माना। पर अपनी धरोहर को बचाने का सदैव प्रयास किया है। तब इन्हें हिंदी का हाल देखकर बुरा लगा, ओर इन्होंने फिर विचार किया कि जब बोलचाल में लोग हिंदी को बोलना इतना पसंद नहीं कर रहे हैं। तो साहित्य जगत का क्या हाल होगा? 

फिर यही सोचकर इन्होंने हिंदी साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए कुछ उचित कदम उठाने का विचार किया जो उनके लिए अनिवार्य हो गया था। यही विचार इनके मन में लगातार आ रहे थे, कि इस साहित्यिक विषय पर कैसे काम किया जाए? उस वक्त ये लगातार टेलीविजन में काम करते हुए, सफलता को हासिल कर रहे थे। 

हिंदी को लेकर इनका लगाव इतना रहा कि हिंदी साहित्य के लिए इन्होंने सन् 2014 में एक यूट्यूब चैनल को बनाया जिसका नाम “हिंदी कविता दिया गया”। 

जिसमें हिंदी साहित्य से जुड़े तमाम साहित्यिकारों की कविताओं का अद्भुत संग्रह उपलब्ध है। जब बाॅलीवुड के साहित्य प्रेमी इनके विचारों से अवगत हुए, तब उन्हें इनके विचार अच्छे लगे व कुछ अलग काम करने की पहल जानकर बहुत खुशी हुई।

बाॅलीवुड के कलाकारों ने इनके हिन्दी प्रेम का समर्थन किया व इनके साथ काम किया। जिसमें इम्तियाज अली से लेकर, मनोज बाजपेयी, पीयूष मिश्रा, स्वरा भास्कर, रसिका दुग्गल, रामगोपाल बजाज, सुरेखा सीकरी, व मानव कौल जैसे बहुत से दिग्गज कलाकार शामिल है, जिन्होंने हिंदी साहित्यकारों की कविताओं जिनमें रामधारी सिंह दिनकर जी से लेकर सुमित्रानंदन पंत, मुक्तिबोध से लेकर भवानी प्रसाद मिश्र, अमृता प्रीतम, नरेश सक्सेना, विनोद कुमार शुक्ल की कविताओं का पाठ कर अपनी वाणी में संजोया है।

जब से लेकर अब तक हिंदी कविताओं के लिए इनका चैनल सभी वर्ग के लिए आकर्षक का केंद्र बन चुका है। युवा इससे प्रभावित होकर वापस हिंदी साहित्य से लगाव महसूस करने लगे हैं। 

मनीष बताते है, 

कि जैसा उन्हें हिंदी से लगाव रहा है, उस लगाव के लिए उन्होंने सभी की बातों को नजरअंदाज किया। व अपना लक्ष्य साधे रखा, क्योंकि इनके लगाव की मंजिल  और डगर इतनी आसान नहीं होने वाली थी। पर इन्होंने हर तरह से मेहनत कर अपने लगाव को उच्च शिखर पर स्थापित किया है। अपनी मंजिल व अपने जज़्बे को इन्होंने यही सोचकर आरम्भ किया कि जब हिंदी का साहित्य हमारा अपना है, तो इसको संजोए रखने का सफर भी हमारा ही होगा।

जब इन्होंने बाॅलीवुड के कलाकारों के साथ काम किया, तब उन कलाकारों के हृदय में हिन्दी के लिए समर्पण का भाव देखकर इन्हें अतुलनीय आनंद की अनुभूति हुई। इन्हें लगा कि इनकी तरह ही बहुत से लोगों का लगाव हिंदी के प्रति है। यह वही तलाश थी, जिसकी कमी के लिए मनीष ने हमेशा सफर किया है। अब कहीं जाकर वह अधूरी कमी पूरी होने लगी है। हिंदी के लिए वे आगे भी काम करना चाहते हैं। 

मनीष भविष्य में ओर कलाकारों व युवा पीढ़ी के साहित्यकारों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। इनके यूट्यूब चैनल में आइडिया, काॅन्सेप्ट व क्रिएशन इनके ही होते है। इनका मानना है कि, अच्छी टीम के साथ होने की वजह से बहुत सी नई सोच का विकास होता है। 

जब से ये अमेरिका से भारत वापस आए हैं। व अपनी हिंदी भाषा को लेकर इन्होंने जितना भी काम किया है, उसे लेकर सभी ने इन्हें अपार स्नेह व प्रोत्साहन दिया है। एवं अब इनसे प्रेरित होकर युवा भी लेखन व साहित्य में रुचि लेने लग गए हैं।

यही वह कमी थी, जिसकी तलाश इन्हें तब से थी, आज ये आत्मसंतुष्टि के साथ अपने लगाव के साथ जी रहे हैं। और अब ये अपने हिन्दी के लगाव को  ताउम्र उसके साहित्यिक विकास की कोशिश में लगे रहना चाहते है।

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