डिप्रेशन को हराकर, कैसे काॅमेडी किंग बने इंदौरी रंजीत भिया – रंजित भिया

आज इंटरनेट के युग में जिस तरह से यूट्यूब का इस्तेमाल करके यूट्यूबर प्रसिद्धि पा रहे हैं, उन्हीं में से एक है। रंजीत कौशल जी जिन्होंने अलग हटकर करने की कोशिश की, और उनकी उसी अलग सोच ने उनको सफलता के मार्ग पर अग्रसर किया है।

जहाँ काॅमेडी को अलग-अलग तरीके से किया जाता है, वही रंजीत जी ने इंदौरी लहजे में साफ-सुथरी काॅमेडी कर लोगो के दिलों को जीत लिया है। समाज को प्रेरित करने वाले संदेशों के साथ काॅमेडी की जुगलबंदी वाकई कमाल की है।

हम बात कर रहे हैं, इंदौर के रंजीत कौशल जी की, जिनका जन्म 15 जनवरी सन् 1986 को इंदौर के पास के ही गांव देवगुराडिया (दुधिया) में हुआ। बचपन इनका वहीं गांव में बीता इनके पिताजी सरकारी नौकरी में व माताजी गांव की सरपंच रही। 

बचपन से इन्हें काॅमेडी, मिमिक्री का बहुत शौक हुआ करता था। पढ़ाई लिखाई में इनका मन न के बराबर लगता था, पर बस घर वालों के कहने पर जैसे-तैसे अपनी पढ़ाई पूरी की। गांव में सबकी नकल करना, शरारतें करना इनको ज्यादा रास आता था। साथ ही क्रिकेट, पेंटिंग, गिटार में भी इनकी दिलचस्पी रही। तीन भाईयों में सबसे छोटा होने की वजह से परिवार में सबके लाडले रहे। 

पर घर परिवार के काम व जिम्मेदारी पूरी करने में सबसे आगे रहते थे।बचपन का शौक उम्र के साथ बढ़ने लगा और ये उस वक्त लगातार एक्टिंग, मिमिक्री को लगातार शौकिया तौर पर कर रहे थे। 

घर वालों की इच्छा थी, कि ये अपने काॅलेज की पढ़ाई करें, बस इसलिए ही इन्होंने अपनी डिग्री को पूरा किया। 

इन पर उस समय तक ज्यादा जिम्मेदारी नहीं थी, नौकरी का कभी कोई दबाव नहीं रहा। ये निश्चिंत होकर जीवन व्यतीत कर रहे थे । 

उसी दौरान सन् 2016 के समय जब इंटरनेट या यूट्यूब का इतना अधिक प्रचलन नहीं था, तब इन्होंने अपने मित्र अजय के साथ मिलकर एक यूट्यूब चैनल बनाया जिसका नाम अजय एंड रंजीत रखा। रंजीत को एक्टिंग का शौक था, तो ये एक्टिंग करते और अजय एडिटिंग का काम संभाल लेते थे, ऐसे ही चैनल चल रहा था। व्यू भी ठीक-ठीक आ रहे थे। 

उसी साल इनके पिताजी श्री शंकरलाल जी कौशल की अचानक तबीयत खराब हो गई, ओर उन्हें लकवा आ गया। 

इस घटना के साथ ही इनका परिवार बुरी तरह से बिखर गया, अचानक इतना सबकुछ सहन कर पाना कठिन था, और अब इन पर जिम्मेदारी भी आ गई थी। 

परिवार की जिम्मेदारी के साथ ही पिताजी की देखरेख करना ओर बाकी सभी दायित्वों को निभाना भी शुरू कर दिया। ये अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों में कुछ इस तरह उलझ गए, कि इन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर काम करना ही बंद कर दिया।

उन्हीं सब स्थितियों के बीच रंजीत डिप्रेशन का शिकार हो गए, इतने खराब दौर में इनका डिप्रेशन का शिकार हो जाना, सबके सामने ये अब एक नई समस्या उत्पन्न हो गई थी। लगातार दो सालों तक इन्होंने अपना इलाज करवाया, पर एक वक्त आ कर लगा, कि दवाइयों को खाने से बेहतर है, की मन से ही जीता जाए। नहीं तो हार जाएंगें और खुद ही हिम्मत बनाकर स्वयं को संभालने की कोशिश करने लगे। फिर धीरे-धीरे डिप्रेशन से बाहर आने लग गए।

समय चल रहा था, सन् 2019 के समय तक जो पिताजी के बीमार होने के बाद अचानक आई, उथल-पुथल वो भी अब थोड़ी सी स्थिर होने लगी थी, हालातों में थोड़ा कुछ सुधार हो रहा था। तब तक ये भी पूरी तरह ठीक हो गए थे, पर पिताजी के स्वास्थ्य में कोई सकारात्मक परिवर्तन नहीं हुआ था। 

उस समय इनको विचार आया कि जो इनका जुनून है, उसी को जीना व उसके लिए समर्पित हो जाना चाहिए। क्योंकि जब उम्र का पड़ाव पार कर जाएंगें, तब यही लगेगा कि काश उस वक्त अपने सपनों को पूरा करने के लिए थोड़ी सी कोशिश कर लेते तो आज जिंदगीं काश में नहीं बीत रही होती।

यही सोच कर इन्होंने यूट्यूब की तरफ वापस आने का सोचा पर तब तक वहां प्रतिस्पर्धा का बोलबाला था, पर ये सोशल मीडिया पर एक अलग क्वालिटी देना चाहते थे। कुछ अलग हटकर करना चाहते थे, यही सोच कर इन्होंने अपने चैनल रंजीत भिया की शुरुआत की।  शुरू के समय में इन्होंने इंदौर से जुड़े कुछ सामाजिक मुद्दों व दायित्वों पर विडियो बनाना शुरु किए, उन पर इतने ज्यादा व्यू नहीं मिले। 

ये उस समय फिर हताश भी हुए, पर ये कुछ अलग करने की ठान चुके थे। बहुत सोचा, तब लगा कि इंदौर के खाने-पीने पर बहुत लोग विडियो बनाते हैं, पर मुझे इंदौरी भाषा, जिस तरह से शब्दों को अलग तरीके से बोला जाता है, यहाँ कि अतंरगी बातों पर विडियो बनाना चाहिए।

फिर इन्होंने विडियो बनाकर शुरुआत की। ये जनता को कुछ अलग क्वालिटी देना चाहते थे। कुछ ऐसा जो सभी को अपने जीवन से मिलता-जुलता और कुछ अपनापन महसूस करवा सके। इनके विडियो जब लोगो तक पहुंचें ओर वह लोगो को बहुत पसंद आने लगे। विडियो शेयर किए जाने लगे ओर रंजीत कौशल, को अब रंजीत भिया के नाम से पहचान मिलने लगी।

प्रसिद्धि के पहले तक लोगो ने आलोचना की, मजाक भी बनाया, नकारात्मक टिप्पणियां भी करते रहते थे। 

पर रंजीत के पास हमेशा अपनी पत्नी पूजा जी का साथ रहा।

इनकी पत्नी ने यही कहा कि, किसी के कुछ भी बोलने से कोई फर्क नहीं पड़ता। आपकी खुशी, आपका जुनून नए रास्तों को बनाएगा। क्योंकि दुनिया सिर्फ बातें ही कर सकती है, पर उनको गलत साबित करने के लिए आपको मेहनत करना है, ओर उन लोगो को गलत साबित करना है।

फिर इन्होंने सभी की आलोचनाओं को नजरअंदाज कर, अपनी विडियो पर, ओर अपने रंजीत भिया के चरित्र पर विशेष ध्यान देने लगे।धीरे-धीरे जनता से जुड़ने लगे, ओर जनता का उतना ही प्यार मिलने लगा।

अब लोग रंजीत भिया के विडियो का बेसब्री से इंतजार करते हैं और ये भी उतनी ही शिद्दत से उन विडियो पर काम करते हैं। अब रंजीत के यूट्यूब विडियो पूरे देश के साथ ही विदेशों में भी प्रसिद्धता प्राप्त हो रही है। इंदौरी होने से इनको अलग पहचान मिलने लगी है।

रंजीत बताते हैं, 

कि काॅमेडी के अनेक रुप होते हैं, पर काॅमेडी ऐसी करना चाहिए, जिसे लोग अपने घर परिवार के साथ मिलकर देख सके। इनका पहला वायरल विडियो इंदौरी कसमें रहा, फिर रंगों के सरनेम, इंदौरी शादी की तैयारी ओर सभी विडियो जनता ने बहुत पसंद किए।

रंजीत जब कशमकश में थे, कि कहीं नौकरी कर अपना भविष्य सुरक्षित करें या अपने सपने को पूरा करें, उस सपने को पूरा करने के लिए सबसे ज्यादा सहयोग इनकी धर्मपत्नी और परिवार वालों का रहा है। यदि उनका समर्थन नहीं होता तो इनका वर्तमान कुछ ओर होता।

भविष्य में रंजीत चाहते हैं, कि वे अपनी काॅमेडी अपने किरदार को ओर अच्छे से जनता के बीच रख सके, व सामाजिक मुद्दों को अपने अंदाज में जनता के सामने पेश कर सके। हमेशा सकारात्मक व पारिवारिक हंसी-खुशी की बातें काॅमेडी के तरीके से प्रस्तुत करना व रोजमर्रा के पहलूओं का अवलोकन कर विडियो बनाना चाहते हैं।

जिस तरह से जनता का प्यार मिल रहा है, भविष्य में भी मिलता रहे। उसके लिए ये लगातार अच्छे से अच्छे कंटेंट को बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अब कई कम्पनियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ओपन माईक, अवेयरनेस कार्यक्रमों का हिस्सा बनने लगे हैं।

इन्हें अब बाॅलीवुड से भी आॅफर आने लगे हैं, पर ये अपनी पसंद का किरदार मिलने का इंतजार कर रहे हैं। साथ ही सामाजिक दायित्व को भी अपनी जिम्मेदारी समझ कर पूरा कर रहे हैं। समाज के लिए सकारात्मक संदेश देने की हमेशा कोशिश करते हैं।

जब रंजीत के विडियो देखकर कोई खुश होता है, तब इन्हें लगाता है, कि इनकी मेहनत सफल हो गई है। 

जिस तरह ये डिप्रेशन का शिकार हुए हैं, उस तरह कोई ओर डिप्रेशन का शिकार ना हो व लोग अपने दर्द व गमों को भूलकर इनके विडियो के माध्यम से जुड़ कर खुश रहने की कोशिश करें। इन्हीं कारणों की वजह से ये लगातार अच्छे से अच्छे विडियो जनता तक पहुंचाने का प्रयास करते है।

More from author

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related posts

Latest posts

जयपुर में साहू की चाय, जिसका अनोखा स्वाद लेने मुख्यमंत्री, मंत्री, सेलिब्रिटी सभी आते हैं, क्या है, चाय में खास – साहू की चाय

चाय!  चाय का नाम सुनते ही याद आ जाती है, छोटी-सी चाय की दुकान, उबलती हुई चाय, जिसके स्वाद की महक आसपास के वातावरण को...

डिप्रेशन को हराकर, कैसे काॅमेडी किंग बने इंदौरी रंजीत भिया – रंजित भिया

आज इंटरनेट के युग में जिस तरह से यूट्यूब का इस्तेमाल करके यूट्यूबर प्रसिद्धि पा रहे हैं, उन्हीं में से एक है। रंजीत कौशल...

अमेरिका में नौकरी छोड़ क्यों चुनी मनीष ने हिन्दी साहित्य उत्थान की राह, ओर क्यों शुरु किया “हिन्दी कविता” यूट्यूब चैनल – मनीष गुप्ता

जिस तरह हम सभी का हिंदी के प्रति असीम स्नेह व गहरा संबंध है। वैसे ही जैसे माँ का अपने बच्चों के लिए निस्वार्थ...

ताजा खबरों से अपडेट रहना चाहते हैं ?

हमें आपसे सुनना प्रिय लगेगा ! कृपया अपना विवरण भरें और हम संपर्क में रहेंगे। यह इतना आसान है!