छोटे-छोटे प्रयासों से समाज को दिशा देते समाजसेवी – संजय नीमा

जिस तरह मानव का जीवन बिना समाज के अधूरा है, उसी तरह समाज भी समाजसेवियों के बिना अधूरा है, समाज के लिए समर्पित कुछ लोग समाज के लिए दिन रात सेवा करने के लिए तत्पर रहते हैं।

आज हम बात कर रहे हैं, समाजसेवी श्री संजय जी नीमा की, जिन्होनें सरकार की एक पहल “घर की पहचान बेटियों के नाम” को स्वयं की जिम्मेदारी मानकर, लगन से अपनाना शुरु किया।

संजय जी का जन्म 20 नवंबर सन् 1972 को मध्यप्रदेश के मंदसौर में हुआ, सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में इनका बचपन बीता, बचपन से ही इन्हें समाज की भूमिका बहुत आकर्षक लगती थी, कैसे समाज से जुड़कर किसी की मदद की जा सकती है, यह सब इनके मन में चलता रहता था। 

 पढ़ाई के बाद इन्होंने  प्रिंटिंग का व्यवसाय शुरु किया, इन्होंने यह व्यापार लगभग दस सालों तक किया, ओर छोटे स्तर पर समाजसेवा को करना शुरु कर दिया था, पर समाज के प्रति दायित्वों के कारण इन्होंने उस व्यवसाय को पूरी तरह बंद कर दिया था।

फिर इन्होंने इंश्योरेंस सेक्टर में काम की शुरूआत कर दी, ओर अपनी समाजसेवा को भी ज्यादा समय देने लगे, परिवार ने इनको हमेशा सहयोग किया है।

      सबसे पहले संजय ने गौ ग्रास डालना आरम्भ किया, पक्षियों को दाना डालना, रोड़ पर घुमने वाले कुत्तों को दूध, टोस्ट और बिस्किट डालते थे, वृक्षारोपण करना, छोटे-छोटे पौधों की देखभाल करना शुरू किया, अब ये सब इनके जीवन का अटूट हिस्सा हो गया था, बिना किसी स्वार्थ भावना के। 

    सन् 2010 के लगभग ये योग से जुड़े, जिससे जुड़ने के बाद समाज में इनकी पहचान होने लगी, लेकिन ये राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते थे, ये बिना किसी मतलब के सबकुछ कर रहे थे।

लगातार इनको समाज से जुड़कर समाज के लिए कार्य करने में खुशी होती थी, ये भी संस्था या व्यक्ति से आर्थिक मदद लिए बिना स्वयं के खर्च पर सेवा करते हैं।

अब सन् 2017 के लगभग सरकार की एक योजना, जिसको नाम दिया गया था, “घर की पहचान बेटियों के नाम” यह इन्हें इतना अच्छा लगा कि इन्होंने अपनी बेटी चैताली नीमा के जन्मदिन पर घर की पहचान उनकी बेटी के  नाम से दी। 

     धीरे-धीरे संजय ने इस थीम पर ज्यादा काम करना शुरू कर दिया, जिससे प्रभावित होकर कई लोगों ने इस में भाग लिया, ओर इस योजना को सफल बनाया है, अब मोहल्ले, गली में इनकी पहल की झलक नजर आने लगी थी, ओर अपने सामर्थ्य के अनुसार यह कोशिश कर रहे हैं। 

महिलाओं के सम्मान के लिए इन्होंने शुरु से  ही काम किया है, चाहे वह शिक्षा हो या अन्य कोई मदद। 

चाहे वह किसी बालिका की शिक्षा हो, या उसके विवाह से संबंधित कार्य हो, ये हमेशा सहयोग करते हैं। 

  जिंदगी बेहतर होती है, जब आप खुश होते हैं, पर जिंदगी ओर ज्यादा बेहतरीन होती है, जब आपकी वजह से दूसरे खुश होते हैं। 

पाॅलिथीन के उपयोग जिसको लेकर हम सभी लोगों में जागरूकता की आवश्यकता है, उसके लिए ये काम कर रहे हैं, उसमें समय दे रहे हैं, पाॅलीथीन के उपयोग को ना करने की अपील कर रहे हैं। 

वृक्षों को जल देना, उनमें खाद डालना, उनकी देखभाल करना ये स्वयं से ज्यादा उनकी जिम्मेदारी मानते हैं, क्योंकि उनसे ही प्राणवायु मिलती है। 

कोरोना काल में जिनकी मृत्यु हुई है, उनके नाम से ऑक्सीजन  देने वाले वृक्षों का वृक्षारोपण करना इनका संकल्प बन गया है।

आज के समय में स्वयं का धन समाज के लिए खर्च करना, बहुत बड़ी बात है, ये बताते हैं, कि सेवा भाग्य से ही मिलती है।

यहां अनाथ बच्चों और वृद्धजनों को अपना परिवार मानकर इनकी सेवा में सदैव तत्पर रहते हैं, उनके लिए दवाई, भोजन या आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति करने की कोशिश करते रहते है। 

गांव ओर शहर को स्वच्छ बनाने के लिए ये स्वयं बहुत से कार्यक्रम का आयोजन करते है, जिसमें स्वच्छता को महत्वपूर्ण माना जाता है।

संजय बताते हैं कि, वे भविष्य में समाज को नया आयाम देना चाहते हैं, जिसमें बेटियों को लेकर कई, योजनाएं होंगी, यहीं इनका एक ओर सकंल्प है, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ओर बेटियों को सशक्त बनाओ, वृक्षों की सेवाओं का संकल्प होगा, जानवरों की सेवाओं के लिए लोगों को जागरुक किया जाएगा।

     खुद के लिए तो हर कोई जीता है, कुछ विरले ही होते हैं, जो समाज ओर प्रकृति के लिए जीते हैं।

सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए इन्होंने हेलमेट  ओर सीटबेल्ट लगाने के लिए भी लोगों को सजग किया है, जिसमें करवाचौथ के पर्व पर इनसे जुड़ी महिलाओं ने अपने पतियों को हेलमेट देकर उनकी सुरक्षा का वादा किया है। 

संजय जी समाज के लिए,  निस्वार्थ भावना से जो भी सेवा कर रहे हैं, इनकी यह पहल समाज के लिए अनुकरणीय है।

    हमेशा सकारात्मक सोचना, आत्मविश्वास को मजबूत बनाता है। 

अपने जीवन को समाज के प्रति न्योछावर कर देना ही इनका सपना है, जिसमें इनका परिवार हमेशा इनके साथ रहता है।

   अच्छे कार्यों को लेकर इन्हें कई जगह सम्मानित भी किया गया है। 

  यदि समाज में रहने वाला हर व्यक्ति थोड़ा भी जिम्मेदार हो जाए, तो एक हद्द तक सफलता ओर विकास आसानी से हो जाएगा।

   जिस प्रकृति ने हमें सब कुछ दिया है, बदले में उसकी देखभाल ओर रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।

संजय जी की समाजसेवा हम सभी को प्रेरणा देती है, कि बिना किसी स्वार्थ के छोटे-छोटे प्रयासों से समाज को एक नई दिशा दी जा सकती है  

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