ग्वालियर के शाकुल बास्केटबॉल कोच से कैसे बने तेलुगू फिल्म के हीरो, ओर कैसे सीखी तमिल – शाकुल शर्मा

मन में लगन हो तो सबकुछ आसान होने लगता है, जिसका एक उदाहरण अब हमारे साथ है।

हम बात कर रहे हैं, शाकुल की जिनका जन्म ग्वालियर मध्यप्रदेश में 29 अगस्त को हुआ है, परिवार में सभी व्यापार ओर नौकरी में रहे हैं। पर इनकी चाह कुछ अलग करने की रही तो इन्होंने कभी नौकरी या व्यवसाय का सोचा तक नहीं। 

बचपन ओर पढ़ाई  इनके अपने शहर ग्वालियर से ही हुए है, जितने अच्छे शाकुल पढाई में थे, उतना ही इनका मन खेल में भी लगता था। इन्होंने स्कूल के समय से ही बास्केटबॉल खेलना शुरू कर दिया था, जिसको लगातार इन्होनें मन लगाकर खेला। 

“इन्होंने तीन बार बास्केटबॉल नेशनल लेवल पर खेला, ओर  एक बार ऑल इंडिया युनिवर्सिटी लेवल पर ओर दो बार आॅल इंडिया स्पोर्ट्स मीट में दो गोल्ड मेडल को भी जीता है।” 

पर मन को सुकून फिर भी नहीं मिल रहा था, कोई ख़लिश बाकी थी, जिसको पूरा करने की जद्दोजहद में ये लगे हुए थे, पर क्या कमी थी, बस यही समझ नहीं आ रहा था। 

एम.ए की डिग्री अपने शहर से प्राप्त करने के बाद, अपनी मंजिल की तलाश में ये दिल्ली चले गए, फिर वहाँ के एक प्रतिष्ठित संस्थान में लगातार चार सालों तक बास्केटबॉल कोच बनकर नौकरी की। 

घर परिवार से दूर रहकर दिल्ली में नौकरी जरुर करते थे, पर नौकरी में धीरे-धीरे मन लगना कम हो गया था, नौकरी करना कभी इनका सपना रहा ही नहीं है, क्योंकि वह सुकून जिसकी इन्हें तलाश थी, पर वह यह नहीं था, क्या था, जिससे ये अंजान थे। 

फिर कुछ ही समय बाद दिल्ली में शाकुल की मुलाकात एक पुराने दोस्त से हुई, शाकुल को देखकर उसने इन्हें माॅडलिंग करने की सलाह दी, पर इनको माॅडलिंग का शौक रहा ही नहीं तो बस उसको मना कर दिया था।

पर उस समय के बाद इन्होंने अभिनय के क्षेत्र में आने का मन बना लिया, क्योंकि शायद किस्मत इन्हें वहाँ ले जा रही थी। तब सन् 2014 के दौरान मुम्बई आ गए, जहाँ के एक 

KR EATING CHARACTERS इंस्टीट्यूट में इन्होंने एक्टिंग का कोर्स किया।

फिर शुरूआत की, थियेटर से अभिनय की, अपने भावों की अभिव्यक्ति की। अपने सपनों के आगाज की। 

जब से शाकुल मुम्बई आए तब से इन्होंने खुद को तराशने की शुरुआत कर दी थी, तब लगने लगा कि यह वही सुकून है, जिसकी इन्हें तलाश थी, तो बस लग गए, दिन रात मेहनत ओर सपनों को रंगने के लिए। 

फिर धीरे-धीरे इनका सफर शुरू हुआ मायानगरी में, लोगो से सम्पर्क बनाना शुरू किए, समय के साथ एड फिल्म, रैम्प वाॅक के मौके मिलने लगे। 

शुरु से ही इनके परिवार वालों ने इनके सपनों को समझा है, शाकुल के परिवार वाले इनके सपनों को साकार करने में इनका साथ दे रहे थे, अब इनका सपना ही परिवार का सपना बन गया था।

“अब कुछ समय बाद ही इन्हें एक तेलुगू फिल्म रिपब्लिक में अभिनय का मौका मिला” पर समस्या ये थी, कि इन्हें तेलुगू आती नहीं थी, पर फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर के लिए यह एक दम परफेक्ट रोल में आ रहे थे। 

इनसे जब बात हुई तब इन्होंने ऑडिशन दिया, किस्मत से ये उसमें पास भी हो गए, नया अध्याय जुड़ने के साथ बहुत उत्साह मन में था। 

रिपब्लिक फिल्म में इनके साथ

साई तेज धर्म, ऐश्वर्या राजेश, रमिया कृष्णा थी। 

अब समस्या तेलुगू बोलने की आ रही थी, इन्हें लगा कि रोल छोटा होगा, ओर डबिंग हिन्दी में होगी तो इनको कोई परेशानी नहीं होगी, ऐसी उम्मीद इन्हें थी।

पर डबिंग ना होकर, इन्हें तेलुगू में डायलाॅग बोलने थे, जब इनकी शूटिंग के समय दस पेज की स्क्रिप्ट आई, तो स्क्रिप्ट देखकर इनके होश उड़ गए थे। 

वहाँ से ना होकर तेलुगू बोलना, उसको सीखना मुश्किल लग रहा था, जब इन्हें कुछ समय मिला, तब लगभग 20 दिनों के समय में इन्होंने अपने दोस्त की मदद से तेलुगू सीखी, ओर फिल्म में काम किया। 

इनका काम सभी को पसंद आया, ओर इन्हें लगातार तेलुगू फिल्म में काम करने का मौका मिलने लगा, उम्मीद पर खरा उतरने की कोशिश की, ओर सफलता भी मिली। 

“इनकी अगली फिल्म राधेश्याम है, जिसमें इन्होंने पूजा हेगड़े ओर प्रभाष के साथ काम किया है। यह फिल्म जल्दी ही सिनेमाघरों में देखने को मिल जाएगी।” 

शाकुल बताते हैं, कि उनका यह सफर आसान नहीं रहा है, ओर ये सफर की शुरुआत है, कई कठिनाइयों का आना अभी बाकी है।

    मुश्किलें सभी को आती है, कोई लड़ जाता है, तो कोई हार मान जाता है, कामयाबी कभी रातोंरात हासिल नहीं की जा सकती है। 

इटैलियन ब्रांड के कई एडवर्टाइज किए है, ओर एक पंजाबी गाना किया है, जो सुपरहिट रहा है। 

कॉर्मिशयल एड में बहुत काम किया है, 

रैम्प शो, बड़े स्तर के शो में भी काम किया है। 

एक्टिंग कोर्स के दौरान रोज ऑडिशन देना, कभी काम मिलना या ना मिलना यह सब इनकी आदत बन चुका था, पर ना हारना एक जुनून था। 

जुनून सबसे पहले रहा, तो आज सफलता की राह पर अग्रसर है, सब्र, मेहनत, ओर काम करने की लगन कभी ना कभी तो कामयाबी की सीढ़ियों पर पहुंचा ही देती है।

ऐसा ही जुनून यदि किसी के मन में है, तो कामयाबी मुश्किल नहीं होती है। छोटी सी चीटियां अपना रास्ता तय करती है, तो हम क्यों नहीं कर सकते हैं।

हमारे जन्म के साथ ही हमारे जीवन का उद्देश्य भी तय हो जाता है इसी प्रकार शाकुल अपने परिवार ओर शहर का गौरव बनकर उनका नाम आगे बढा रहे हैं, इनकी लगातार काम करने की चाहत है, जिससे ये स्वयं अभिनय जगत में प्रतिष्ठित कर सके। 

शाकुल के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए, टीम अपनी पहचान की ओर से इन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ।

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