स्वाद को लेकर बरसों से कैसे शहर की शान बना हुआ है, पोरवाल भेलपुरी स्टाॅल ओर काॅफ़ी क्लब – सत्यनारायण पोरवाल

आप चाहे जिस शहर में भी जाए, वहाँ की चौपाटी अपने आप में ही आकर्षण का केंद्र होती है। वहाँ पर मिलने वाला फूड अपने आप में ही विशेष होता है। उसके स्वाद का मुकाबला कहीं से कहीं तक भी नहीं किया जा सकता। क्योंकि हर शहर का अपना अलग ही ज़ायका होता है। 

यहीं हम बात कर रहे हैं, उज्जैन चौपाटी की शान कहे जाने वाले पोरवाल भेलपुरी स्टाॅल की, जिसकी शुरुआत सत्यनारायण जी पोरवाल ने सन् 1976 में की। 

इनका शुरुआती सफर बहुत मुश्किलों भरा रहा। सत्यनारायण जी के पिताजी भी व्यापारी ही रहे। परिवार की आर्थिक स्थिति नाजुक थी, इन्होंने बचपन से ही मुसीबतें उठायी और बड़े होते-होते काम करना शुरू कर दिया था। साथ ही अपनी पढ़ाई को भी जारी रखा। कक्षा 10वीं तक ही पढ़ाई की, ओर फिर परिवार की स्थिति को देखकर इन्होंने व्यापार में जाने का मन बना लिया ओर व्यापार की तरफ चल दिए। 

शुरुआत में इन्होंने खाने-पीने की सामग्री से संबंधित काम किया। कभी चूर्ण, पापड़ से संबंधित तो कभी सिनेमाघरों में फूड बेचने से संबंधित काम किया, इस तरह काम चल रहा था। पर उसमें ना तो सफलता मिल रही थी, ओर ना ही पैसों की जरूरतें पूरी हो पा रही थी, बस ठीक-ठाक काम चल रहा था। इस तरह के व्यापार में आगे बढ़ने के आसार कम नजर आ रहे थे। 

इनके जीवन में परेशानी तो चल ही रही थी, पर तब 1976 में इन्होंने मन बनाया कि, इस साल के दशहरे के मौके पर दशहरा मैदान पर फूड स्टाॅल लगाया जाए। फिर इन्होंने वहां पर स्टाॅल लगाया। लोगो को इनका फूड बहुत पसंद आया। और इन्होंने तब से चौपाटी पर रोज लगने वाले पोरवाल भेलपुरी स्टाॅल की शुरुआत की।

उस समय इनका परिवार एक छोटे से किराये के मकान में रहा करता था। उसी छोटे से घर में ही स्टाॅल का सामान रखना, और परिवार का साथ रहना जारी था। सन् 1982 के करीब इनकी शादी हो गई, और उसी छोटे से घर में गुजर बसर चल रहा था। 

घर बदला जा सके उस वक्त ऐसे हालात नहीं थे। सन् 1987 तक इनके दोनों बेटों का जन्म हो गया था, उनका बचपन भी नाजुक परिस्थितियों में ही बीता पर पहले से हालात अब बदलने लगे थे। स्टाॅल भी ठीक से चलने लगा था।

इनके दोनों बच्चे सचिन ओर सुमित जब थोड़े समझदार होने लगे तब से ही उन्होंने व्यापार में अपने पिताजी की मदद करना शुरु कर दिया, साथ ही हिसाब-किताब देखना ग्राहकों ओर काउंटर को कैसे संभाला जाता है, यह काम सीखना शुरू कर दिया था। 

दोनों भाई स्कूल से आ कर शाम को स्टाॅल की तैयारी करवाते ओर पिताजी के साथ रहकर वहां पूरे काम में मदद किया करते थे। समय के साथ हालात भी बदले ओर करीब सन् 1996 में इन्होंने अपना घर ले लिया। 

कुछ सालों बाद इनके दोनों बच्चे अपनी पढ़ाई खत्म कर व्यापार में ज्यादा से ज्यादा समय देने लगे। तब तक स्टाॅल अच्छा चलने लगा फिर वहाँ काम करने के लिए स्टाॅफ भी रख लिया। ओर बेचे जाने वाले आयटम भी बढ़ाने लगे। इन्होंने सामग्री की शुद्धता ओर अच्छे व्यवहार के साथ सेवा को निरन्तर जारी रखा है। 

फिर सन् 2004 तक आते-आते इनके बेटे सचिन ओर सुमित ने पोरवाल फूड जंक्शन की शुरुआत की, उस समय शहर में कैफ़े का चलन थोड़ा कम हुआ करता था। पर एक नया कदम इन्होंने रखा ओर लगभग आठ सालों तक उसका अच्छे से संचालन किया। पर उसी समय कैफ़े के व्यापार में ज्यादा स्थिति बिगड़ी। 

और फिर इन्होंने पोरवाल फूड जंक्शन को एक नया स्वरूप देकर व नए नाम के साथ प्रस्तुत किया, नया इंटीरियर व नए माहौल के साथ काॅफी क्लब नाम दिया गया। ये काॅफी के लिए विशेष तौर पर प्रसिद्ध है, इनके यहाँ काॅफी की अलग-अलग वैरायटी उपलब्ध होती हैं। काॅफी क्लब अब शहर की शान बन चुका हैं। अब सचिन और सुमित ने फिर इस रेस्टोरेंट के लिए बहुत मेहनत ओर पूंजी निवेश किया। शुरुआत से नया अध्याय शुरू किया। अब ये अपने स्टाॅल के साथ ही अपने काॅफी क्लब का भी अच्छे से संचालन कर रहे हैं।

सत्यनारायण जी बताते हैं, कि जिस तरह का माहौल, और जो स्थिती उस समय हुआ करती थी, अब उससे हालात बहुत बेहतर है। जिस तरह इन्होंने मेहनत व संघर्ष किया है,उसका आज नतीजा सबके सामने है। इस संघर्ष में इनकी माताजी का आशीर्वाद इन्हें सदैव प्राप्त रहा, साथ ही इनकी धर्मपत्नी के हर कदम पर हौसला देने की वजह से ही इतना सब  कुछ संभव हो पाया है।

इन्होंने अपने दोनों बच्चों को भी यही सीखाया है, कि काम कोई बड़ा या छोटा नहीं होता। जिससे हमारी आजीविका चल रही है। उसका सम्मान बहुत ज्यादा जरुरी है। कोई भी काम करने में कभी शर्म नहीं करना चाहिए। जो भी काम करो बस ईमानदारी ओर सबके हित में सोच कर करो। 

क्योंकि लोग हमारे यहाँ स्वाद, क्वालिटी, और गुणवत्ता के लिए ही हमारे साथ जुड़े हुए हैं, बस उसे हमेशा बनाएं रखना। यही मूलमंत्र उनका भी रहा है, और यही सब बातें वो हमेशा सचिन व सुमित को समझाते हैं।* इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर ये अपना काम ईमानदारी से करते हैं। व मधुर व्यवहार के साथ हमेशा पेश आते हैं। 

इन्होंने फूड स्टाॅल हो या काॅफी क्लब उसमे हमेशा काॅफी, भेलपुरी, दहीपुरी और जो भी नए आयटम्स हो उन्हें बेहतर बनाने की हमेशा कोशिश करते हैं। व शहर को नया कुछ देने का प्रयत्न करते है। 

पोरवाल भेलपुरी स्टाॅल पर स्वच्छता ओर साफ सफाई का शुरु से ही विशेष ध्यान दिया जाता है, क्योंकि साफ सफाई से ही आसपास के वातावरण को शुद्ध बनाया जा सकता है। यह हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है, जिसका निर्वहन आवश्यक रुप से किया जाना चाहिए। ताकि लोगो को स्वच्छता दिखे, ओर उन्हें अपने आसपास भी स्वच्छता बनाएं रखने की प्रेरणा मिल सके। 

इसी साफ-सफाई को बरकरार रखने के लिए स्वच्छ भारत अभियान के तहत नगर पालिक निगम शहर द्वारा श्री सत्यनारायण जी पोरवाल को सम्मानित किया गया है।

भविष्य में ये शहर को कुछ नया और बेहतरीन स्वाद देने की कोशिश कर रहे हैं। तब से लेकर आज तक इनके जितने भी कर्मचारी रहे है, उनके साथ इनके पारिवारिक व्यवहार रहे हैं। और अब ये शहर को एक खूबसूरत सौगात देने की तैयारी कर रहे हैं। जितनी मेहनत इन्होंने की है, उसी की सफलता की कहानी आज हमारे सामने है। 

हम भविष्य में इनके प्रतिष्ठान व इनके आने वाले व्यापार के लिए सदैव मंगलकामना करते हैं।

Ashwin Khatri
Ashwin Khatri has laid the foundation of the platform named "Apni Pehchaan", Ashwin has tied himself with the society for many years in the role of social worker at his level. After doing MSc from Udaipur University, he is starting his identity with the aim of giving a new direction to the society. Ashwin Khatri has resolved to nurture the hidden talents, professions behind the scenes of the society and take them all along in future. Contact Mail - ashwinkhatri@apnipehchaan.com

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